महिला ने नौकरी देने के नाम पर फंसाया कामगारों को, नहीं था लाइसेंस

नौकरी देने वाली एजेंसियां, विदेशी कामगारों को खोजने में आमतौर पर दलालों की मदद लेती हैं. ये दलाल कई झूठे वादे कर नौकरी का झांसा देते हैं. कानूनों के मुताबिक नौकरी देने वाली कंपनी को रिक्रूटमेंट फीस देनी होती हैं. लेकिन दलालों की मदद से यह फीस भी कर्मचारी से ही वसूली जाती है. उनसे कहा जाता है कि नौकरी के बाद यह कर्ज चुकाना होगा.

खाड़ी अरब देशों में लाखों की संख्या में प्रवासी मज़दूर काम करने जाते हैं. कोई एजेंट के माध्यम से तो कोई अपने बल बूते पर ! बहुत बार ऐसा भी देखा गया है कि एजेंटों से उन्हें धोखा भी मिल जाता है. इसलिए काम पर जाने वाले कामगारों को अपने एजेंट की सत्यता की जांच कर लेने की सलाह हमेशा दी जाती है. ताकि वे किसी बड़ी मुसीबत में न पड़े !

साथ ही मज़दूरों से विदेश जाने से पहले इतना पैसा वसूला जाता है कि नौकरी के लिए अपना वतन छोड़ने से पहले ही बेचारे मज़दूर कर्ज के भारी बोझ में दब जाते हैं. नौकरी ज्वाइन करने के लिए विदेश पहुंचते ही, बेहद कड़े कानून उन पर लागू हो जाते हैं. उनकी आवाजाही एक शहर तक सीमित हो जाती है.

इसलिए कामगारों को अपने एजेंट की सत्यता की जांच कर लेने की सलाह दी जाती है क्योंकि कई ऐसे फर्जी एजेंट होते हैं जो मासूम कामगारों को फंसा देते हैं। इसी तरह का एक मामला UAE से आया है जहाँ Fujairah Federal Court ने एक महिला पर जुर्माना लगाया है जो घरेलू कामगार की नियुक्ति से जुड़ा एक इंस्टाग्राम अकाउंट चला रही थी. वो भी illegal तरीके से ! क्योंकि उसके पास घरेलू कामगारों की नियुक्ति के लिए लाइसेंस नहीं था।

ये सब धांधली चलते रहने के दौरान महिला के खिलाफ एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई थी जिसमें उसने बताया था कि घरेलू काम के नियुक्ति के लिए महिला ने उससे Dh8,500 रुपए लिए थे। लेकिन इसके आगे की कोई प्रक्रिया शुरू ही नहीं हुई। महिला का हमेशा कुछ न कुछ बहाना ही रहता था ! जो भी व्यक्ति अपना पैसा मांगता था तो उसे मना कर देती थी ! जिसके बाद मजबूरी में व्यक्ति ने महिला के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।

जब शिकायत होने पर फ़ुजैराह पुलिस ने एक्शन लिया तो महिला से पूछ ताछ शुरू हुई ! पहले महिला ने आरोपों से इनकार किया लेकिन बाद में उसने माना कि वह बिना परमिट के ही नियुक्ति का काम करा रही थी और कामगारों को धोखा दे रही थी ! हमेशा से यह देखा गया है कि नौकरी देने वाले अक्सर कामगारों का पासपोर्ट, वीजा और फोन जमा कर लेते हैं. कई बार काम के घंटे घटा दिए जाते हैं और कभी तनख्वाह रोक दी जाती है.

निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले कई मजदूर लेबर कैंपों के छोटे छोटे हॉस्टलनुमा कमरों में रखे जाते हैं. घरेलू सहायक की नौकरी करने वाले तो पूरी तरह घरों में ही कैद रह जाते हैं. तमाम जोखिमों का पता होने के बावजूद खाड़ी के देश हर साल लाखों नागरिकों को अपने यहां बुलाने में सफल होते हैं.

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