पांच देश और 5400 KM दूरी तय करके अगले साल हज के लिए युवक पैदल पहुंचेगा मक्का !

पाकिस्तान के उस्मान अरशद ने इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की थी। तब से वह करीब 540 किमी की दूरी तय कर चुके हैं. बहुत ही नेक काम के लिए उन्होंने इतना बड़ा कदम उठाया है !

उस्मान अगले साल यानी 2023 में होने वाले हज में हिस्सा लेने के लिए पैदल सऊदी अरब के मक्का शहर पहुंचने वाले हैं। उस्मान एक छोटे बैग और छाते के साथ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। ट्रेकिंग जूते पहने 25 साल के छात्र की तीर्थयात्रा पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के ओकारा से शुरू हुई थी। इस्लाम के सबसे पवित्र शहर मक्का तक पहुंचने के लिए उस्मान को पांच देशों से होकर गुजरना होगा और करीब 5400 किमी की दूरी चलकर तय करनी पड़ेगी।

पाकिस्तान के दक्षिण-पश्चिम बलूचिस्तान प्रांत से उस्मान ने बताया, ‘पाकिस्तान से ईरान, ईरान से इराक, इराक से कुवैत और कुवैत से मैं सऊदी अरब में प्रवेश करूंगा।’ इस हफ्ते के बाद उस्मान बलूचिस्तान से ईरान में दाखिल होंगे। उन्हें अपनी यात्रा पूरी करने में आठ महीने लगेंगे। इसका मतलब है कि वह मई में मक्का पहुंचेंगे। उन्हें पैदल मक्का जाने का ख्याल पिछले साल आया जब उन्होंने ओकारा से चाइना बॉर्डर पर खुंजेरब दर्रे तक 34 दिनों की लंबी पैदल यात्रा की। ‘पाकिस्तान में शांति’ को बढ़ावा देने के लिए उन्होंने इस यात्रा के दौरान 1,270 किमी की दूरी तय की।

25 साल के युवक उस्मान ने कहा, ‘उन्हें इस हज यात्रा का ख्याल अपनी पिछली यात्रा पूरी करने के बाद आया। उन्होंने सोचा कि अगर वो व्पकिस्तान में इतना पैदल चल सकते है तो उन्हें उस जगह पर जाना चाहिए जहां जाने की इच्छा हर इंसान की होती है। तो बस उन्होंने अपनी सपनों की यात्रा शुरू कर दी !

अरशद को तैयारियों में नौ महीने का समय लगा और अपने परिवार की मदद यात्रा के खर्च के लिए उन्होंने 5 लाख 59 हजार रुपए इकट्ठा किए। साथ ही पाकिस्तान सरकार ने भी उन्हें दस्तावेजों और वीजा की सभी ज़रूरी सहायता मुहैया कराई। अरशद ने बताया कि वह एक दिन में 45 किमी की दूरी तय करने का प्रयास करते हैं। वह रास्ते में पड़ने वाली मस्जिदो, मदरसों और लोगों के घरों में रात गुजारते हैं। वह जहां भी रुकते हैं, लोग उनकी तीर्थ यात्रा के बारे में सुनकर उनका स्वागत करते हैं और उन्हें गले लगाते हैं। अरशद ने कहा, ‘लोगों की बहुत अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं।

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