जौनपुर के युवक आकाश को सऊदी अरब में बना लिया गया बंधक ! मात्र 1500 रूपए… एयरपोर्ट पर सुनाया अपना दर्द

सऊदी अरब में जाकर कमाना जितना अच्छा लोगों को लगता है उतना अच्छा बहुत से केसेस में नहीं होता है. भारत से जाकर सऊदी में नौकरी करना तो लोगों की पहली पसंद होती ही है, मगर ये वे जाने वाले भी नहीं जानते कि आखिर कौन से पेशे में उनसे काम करवाया जाएगा। बहुत बार ये भी होता है कि प्रवासियों को किसी और नौकरी का वादा करके उन्हें किसी और नौकरियों में धकेल दिया जाता है.

इस तरह प्रवासी कामगार वहां फंस जाते हैं और शिकायत करने पर उनके पासपोर्ट वीज़ा सब कुछ छीना जाता है. उनका वहां घुट घुटकर रहना कोई नहीं जानता। अगर मदद की अपील करें तो सुनने वाला कोई नहीं। ऐसी ही एक खबर आपको बताने जा रहे जहाँ भारत के जौनपुर का युवक सऊदी में बंधक बन गया. भारतीय का नाम आकाश है. उनके साथ भी धोखाधड़ी हुआ. बड़ी कंपनी में नौकरी दिलाने का आश्वासन देकर उन्हें उनके परिचितों ने सऊदी अरब भेजा था.

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मगर वहां उनके साथ जो सलूक हुआ, उसे बयां करते हुए आकाश सिहर उठते हैं। आकाश ने खुद अपने मुँह से बाबतपुर एयरपोर्ट पर बताया कि बंधक बनाकर उन पर बेइंतहा जुल्म ढाए गए। हफ्तों भूखे पेट सोना पड़ा। उन्होंने बताया कि जाते समय वहां किसी बड़ी कंपनी में अच्छा काम दिलाने का आश्वासन दिया गया लेकिन वहां पहुंचते ही ईंट निर्माण में लगा दिया गया और जब उन्होंने इस काम को करने से इनकार किया तो उन्हें बंधक बना लिया गया।

बाद में उन्होंने बचाव का अपील किया और भारत सरकार ने उनकी बहुत मदद की जिसके बाद वे सकुशल भारत अपने वतन लौट आये. उन्होंने इसका श्रेय भारत सरकार को दिया ही साथ ही अपने मित्र विकास योगी को भी दिया। वाराणसी एयरपोर्ट पर केवल उनके दोस्त रंजीत विश्वकर्मा उन्हें लेने आए थे। यह घटना साल 2016 की है. बता दे कि आकाश जौनपुर, बड़ी मस्जिद स्थित शिवाजी कॉलोनी के अबीरगढ़ टोला के रहने वाले हैं। एक एजेंट के माध्यम से पिछले वर्ष 21 अक्तूबर को सऊदी अरब में काम करने गए थे.

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वहीं काम करने के दौरान उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और मऊ के निवासी एखलाक, आलम और असगर से उनकी मुलाकात हुई। सारी समस्या सुन लेने के बाद उन लोगों ने आकाश सेठ को सोशल मीडिया के जरिये अपनी बात दुनिया को बताने की सलाह दी। आकाश ने मोबाइल से अपनी हालात पर आधारित वीडियो बनाने के बाद फेसबुक पर अपलोड कर दिया। उस वीडियो को विकास योगी नामक एक युवक ने देखा और सुषमा स्वराज को ट्वीट किया इसके बाद विदेश मंत्रालय ने भारतीय एंबेसी के अधिकारियों को आकाश सेठ के पास भेजा जिससे उनकी रिहाई हुई.

आकाश ने बताया कि मोहम्मद कैश नामक एजेंट के माध्यम से वह गया था। तीन महीने में उन्हें मात्र पंद्रह सौ रुपये मजदूरी के रूप में मिले। जबकि उनके एक लाख बीस हजार रुपये सऊदी अरब जाने, वहां नौकरी लगवाने के नाम पर खर्च हो गए।

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