सऊदी अरब में आसान होगी विदेशी कामगारों की जिंदगी, बदल गए ये सारे नियम !

भारत समेत कई देशों से लोग सऊदी अरब में मेहनत मजदूरी करने जाते हैं. अकसर उनके दमन और उत्पीड़न की खबरें आती रही हैं. इसी बात को ध्यान में रखते हुए सऊदी अरब के मानव संसाधन और सामाजिक विकास मंत्रालय ने सुधारों का ऐलान किया है. क्या बदलाव हुए हैं, किस तरह अब विदेशी कामगारों का जीवन आसान होगा !

सऊदी अरब में काम करने वाले विदेशी कामगार अब सऊदी अरब में आसानी से नौकरी बदल सकते हैं. इसका मतलब है कि वे अपनी स्पॉन्सरशिप एक कंपनी से दूसरी कंपनी को ट्रांसफर करा सकते हैं. जब उन्हें सऊदी अरब छोड़ना होगा उन्हें फाइनल एक्जिट वीजा दिया जाएगा. इसके लिए नौकरी देने वाली कंपनी की मंजूरी जरूरी नहीं होगी. नौकरी करते हुए भी वे सऊदी अरब से अपने देश आसानी से जा सकते हैं और फिर वापस आ सकते हैं.

इन सुधारों की लंबे समय से मांग हो रही थी. सऊदी सरकार में उप मंत्री अब्दुल्लाह बिन नासेर अबुथनैन ने कहा है कि नई “श्रम संबंध पहल” को मार्च 2021 से लागू किया जाएगा. इससे सऊदी अरब की लगभग एक तिहाई आबादी प्रभावित होगी. सऊदी अरब में लगभग एक करोड़ विदेशी कामगार रहते हैं.

मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वॉच की रिसर्चर रोथना बेगम कहती हैं कि उन्हें अब तक जो सूचना मिली है उससे पता चलता है कि सऊदी अधिकारी खाड़ी देशों में पाए जाने वाले “कफाला” स्पॉन्सरशिप सिस्टम के कुछ प्रावधानों को हटा रहे हैं, जिसके तहत विदेशी कामगार नौकरी देने वाली कंपनी पर निर्भर रहते हैं.

चलिए अब बात करते हैं सऊदी अरब के कफाला सिस्टम के बारे में ! कफाला सिस्टम के तहत कामगारों के पास शोषण से बचने का बहुत कम मौका होता है, क्योंकि अब तक नौकरी देने वाली कंपनी ही इस बात को तय करती आई है कि वे देश से बाहर कब जाएंगे और उन्हें नौकरी बदलने की अनुमति होगी या नहीं. बेगम ने हाल में एक रिपोर्ट में लिखा कि किस तरह कंपनियां विदेशी कामगारों के पासपोर्ट रख लेती हैं और फिर उनका शोषण होता है. उनसे ज्यादा काम कराया जाता है और वेतन नहीं दिया जाता. इसी कारण सैकड़ों कामगार भाग जाते हैं और फिर उनके पास अपनी पहचान का कोई दस्तावेज नहीं होता.

सऊदी अरब में सुधारों का ऐलान क्राउन प्रिंस के विजन 2030 के मद्देनजर किया गया है जिसका मकसद देश को विदेशी निवेशकों के लिए आकर्षक बनाना, निजी सेक्टर का विस्तार करना और तेल पर निर्भर देश की अर्थव्यवस्था को विविध बनाना है. विदेशी कामगारों पर रिसर्च करने वाले अली मोहम्मद कहते हैं कि जब तक काम और रहने के वीजा को एक व्यक्ति यानी स्पॉन्सर से जोड़ कर रखा जाएगा, तब तक कफाला सिस्टम बना रहेगा. वह कहते हैं कि सऊदी अरब में विदेशी कामगारों की हालत बहुत खराब है. वह मानते हैं कि विदेशी कामगारों को सिर्फ एक स्पॉन्सर के चंगुल से मुक्त करने के कदम का स्वागत होना चाहिए.

 

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