सऊदी अरब ने आठ देशों में भारत को भी चुना !

बीते कुछ महीने पहले यानी सितम्बर में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर तीन दिनों के दौरे पर सऊदी अरब पहुँचे थे. एस जयशंकर की मुलाक़ात सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से भी हुई थी. इस मुलाक़ात में उन्होंने क्राउन प्रिंस को पीएम मोदी का एक लिखित संदेश सौंपा था. सऊदी अरब भारत के लिए न केवल ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अहम देश है बल्कि वहाँ 26 लाख भारतीय काम भी करते हैं.

ऐतिहासिक रूप से सऊदी अरब पाकिस्तान के क़रीब रहा है लेकिन बदलती वैश्विक परिस्थिति में भारत के साथ क़रीबी बढ़ी है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अपने सऊदी दौरे पर कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में न केवल अपने प्रभावी आँकड़ों के कारण सऊदी अरब अहम खिलाड़ी है बल्कि ऊर्जा बाज़ार में भी काफ़ी मज़बूत है. क्यूंकि भारत सऊदी अरब से 18 फ़ीसदी कच्चा तेल और अपनी ज़रूरत की 30 फ़ीसदी एलपीजी सऊदी अरब से ही आयात करता है.

एस जयशंकर ने इंटरव्यू में बताया है कि भारत और सऊदी अरब का साथ क्यों ज़रूरी है. सऊदी अरब भारत के लिए अहम आर्थिक साझेदार है. पिछले वित्त वर्ष में सऊदी अरब से भारत का द्विपक्षीय व्यापार 42.86 अरब डॉलर का था. जयशंकर ने कहा कि हाल के वर्षों में दोनों देशों के पारस्परिक निवेश बढ़े हैं.

अक्टूबर 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सऊदी अरब का दौरा किया था. इसी दौरे में सऊदी अरब के साथ स्ट्रैटिजिक पार्टनर्शिप काउंसिल (एसपीसी) पर सहमति बनी थी. जयशंकर एसपीसी की बैठक में ही शामिल होने सऊदी अरब गए थे. भारत में सऊदी अरब 18वाँ सबसे बड़ा निवेशक है. सऊदी ने भारत में 3.15 अरब डॉलर का निवेश किया है. जयशंकर ने कहा कि भारत की ओर से भी सऊदी अरब के आईटी, कंस्ट्रक्शन और ट्रांसपोर्टेशन में दो अरब डॉलर का निवेश हुआ है.

भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ”दोनों देशों के बीच ऊर्जा, डिज़िटल अर्थव्यवस्था, माइनिंग, रिफाइनिंग, पेट्रोकेमिकल्स, इन्फ़्रास्ट्रक्चर, कृषि, मैन्युफैक्चरिंग, शिक्षा और स्वास्थ्य में सहयोग बढ़ाने पर बात हो रही है. मुझे उम्मीद है कि आने वाले दिनों में इन क्षेत्रों में दोनों देशों के बीच सहयोग और मज़बूत होगा.” वहीँ एस जयशंकर ने कहा, ”कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें सऊदी अरब की परिकल्पना 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने में भारत सहयोग कर रहा है. यहाँ तक कि सऊदी अरब ने विज़न 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए रणनीतिक साझेदार के रूप में जिन आठ देशों की पहचान की हैं, उनमें भारत भी शामिल है.

सऊदी अरब के विज़न 2030 के तहत दोनों देशों के बीच आर्थिक साझेदारी बढ़ाने की बात है. भारत की उभरती अर्थव्यवस्था से सऊदी अरब को निश्चित तौर पर फ़ायदा होगा. न केवल निवेश के ज़रिए बल्कि भारत के स्किल्ड मैनपावर से भी सऊदी अरब को फ़ायदा होगा.” भारतीय विदेश मंत्री ने कहा, ”सांस्कृतिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ रहा है. 2010 में दोनों देशों ने सांस्कृतिक सहयोग के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था.”

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