पहली बार हॉलीवुड फिल्मों में दिखेगा सऊदी अरब का अद्द्भुत नज़ारा !

जैसा कि आप भी जानते होंगे एक मुस्लिम देश होने के नाते कभी फिल्मों पर बैन लगाया करते था सऊदी अरब सरकार, मगर अब बहुत कुछ बदलने लगा है ! सऊदी अरब किंगडम रेत यानी डेजर्ट का हॉलीवुड बन रहा है. जहां हर शहर में सिनेमा हॉल खोले जा रहे हैं.

सैंडस्टोन की पृष्ठभूमि में जैसे ही एक हेलीकॉप्टर उतरता है, रेत के घने बादल छा जाते हैं। यह सीन हॉलीवुड वॉर फिल्म ‘कंधार’ का है। पर ये शूटिंग कंधार में न होकर उससे करीब 3200 किमी दूर सऊदी अरब के अल उला में रेगिस्तान पर हो रही है।

80 के दशक में सिनेमा पर बैन लगाने वाले देश में यह बदलाव हैरान करने वाला है। अब यह खुद को डेजर्ट के हॉलीवुड के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है. हर शहर में सिनेमा स्क्रीन खुल रहे हैं। जनवरी महीने में जेद्दा ने रेड सी फिल्म फेस्टिवल की मेजबानी की और अब विदेशी निर्माताओं को शूटिंग के लिए आकर्षित किया जा रहा है। साल 2017 तक साइंस म्यूजियम में बने देश के एक मात्र सिनेमाघर में डॉक्यूमेंट्री दिखाई जाती थी। इसके अगले साल ही रियाद में अमेरिकी चेन एएमसी की एक शाखा ने मार्वल की ब्लैक पैंथर के साथ परदा उठाया। तब से अब तक 500 स्क्रीन और खुल चुकी हैं।

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सऊदी के इस यू-टर्न के तीन मकसद हैं, पहला तो इकोनॉमी को तेल से अलग करना, युवा आबादी को संतुष्ट रखना और अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा में सुधार करना। यही वजह है कि वह 2030 तक मनोरंजन उद्योग में 4.8 लाख करोड़ रुपए निवेश करने जा रहा है। उसे उम्मीद है कि लोग मनोरंजन पर खर्च 2.9% से दोगुना बढ़ाकर 6% कर देंगे। तब तक स्क्रीन की संख्या चार गुना बढ़ाकर 2000 करने और बॉक्स ऑफिस को 7520 करोड़ का बनाने की योजना है। इसलिए जेद्दा में फिल्म फेस्टिवल से पहले सऊदी अरब ग्रांड प्री की मेजबानी की गई। इसमें जस्टिन बीबर की प्रस्तुति भी थी।

सऊदी अरब सरकार का अगला कदम विदेशी निर्माताओं को लाना और उनसे सीखना है। ‘कंधार’ पूरी होने को है, डेजर्ट वॉरियर का बजट 1053 करोड़ रुपए है। इसके निर्माता एरिक हेदायत का कहना है, अल उला की गलियों से घिरे अंतहीन टीले, ऊबड़-खाबड़ चट्‌टानें लुभावना परिदृश्य बनाती हैं। यहां ‘कल्पना का अरब, अफगानिस्तान या मंगल भी दिखा सकते हैं।

सऊदी अरब सरकार विदेशी निर्माताओं की समस्या दूर करने की हरसंभव कोशिश कर रही है। सऊदी फिल्म कमीशन ने हाल ही में लागत पर 40% छूट देने का ऐलान किया है। सरकारी निकाय ‘फिल्म अलउला’ पूल के साथ ऑफिस स्पेस बना रही है। फरवरी से यहां पर स्थानीय लोगों को फिल्म निर्माण की ट्रेनिंग दी जाएगी। 2030 तक 20 लाख लोगों की क्षमता वाली फ्यूचर सिटी निओम में ट्रू मीडिया हब बनाया जाएगा। निओम में मीडिया इंडस्ट्री के प्रमुख वेन बोर्ग बताते हैं, ‘हब में पोस्ट प्रोडक्शन और विजुअल इफेक्ट्स जैसे अहम काम भी किए जा सकेंगे।’

 

 

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