HomeSaudi Arabiaआज़ादी से पहले "सऊदी अरब" किस देश का गुलाम था !

आज़ादी से पहले “सऊदी अरब” किस देश का गुलाम था !

सऊदी अरब के नागरिकों और सभी प्रवासियों को आज 23 सितम्बर को सऊदी किंगडम के 92वें राष्ट्रीय दिवस की बहुत-बहुत मुबारक। पूरा देश आज इस गर्व के दिन को मनाने में जुटा है. बहुत सारे प्रोग्राम तो 18 सितंबर से ही शुरू हो गए हैं. बता दे कि नेशनल डे का प्रोग्राम व कार्यक्रम 26 सितंबर तक जारी रहेंगे।

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अगर सऊदी अरब के इतिहास की बता करें तो सऊदी अरब पहले तुर्की का गुलाम था यानी ऑटोमन साम्राज्य का हिस्सा था. लेकिन सऊदी के कबीलों को यह नहीं पसंद था कि तुर्की का खलीफा उस पर राज करें क्योंकि अरबी मुस्लिम अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे और तुर्क अपने आप को श्रेष्ठ समझते थे। तुर्की के खलीफा ने इस्तांबुल से अम्मान फिर अम्मान से दमास्कस यानी दमिश्क़ फिर दमास्कस से होते हुए सऊदी अरब के विशाल रेगिस्तान को पार करके मक्का और मदीना तक रेलवे लाइन बिछाई थी जिसे हेजाज रेलवे कहते हैं.

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तुर्की का खलीफा सऊदी अरब के लोगों से एक गुलाम की तरह व्यवहार करता था और उसका कमांडर जब चाहे तब अरबों को मार डालता था उसी समय अंग्रेज तुर्की के खलीफा का पतन करना चाहते थे अंग्रेजों को यह बहुत अच्छा मौका मिला और उन्होंने कैप्टन लॉरेंस को इस गुप्त ऑपरेशन पर लगा दिया. लॉरेंस पहले भी इजिप्ट लीबिया सीरिया इत्यादि जगहों पर तैनात रहे थे इसलिए उन्हें अरबी बहुत अच्छी तरह आती थी फिर उन्होंने मक्का के गवर्नर और सऊदी अरब के दो बड़े कबीले यानी सऊद कबीला और वहाब कबीला को तुर्की के खलीफा के खिलाफ लड़ाई के लिए तैयार कर लिया ।

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फिर एक भीषण लड़ाई हुई। लॉरेंस ने सऊदी कबीलों के साथ मिलकर हेजाज़ रेलवे को उड़ा दिया। तुर्की की सेना परास्त हो गई और सऊदी अरब एक आजाद देश बना. उसके बाद अंग्रेज सऊदी अरब को छोड़कर चले गए क्योंकि उस वक्त सऊदी अरब में तेल नहीं था, बेहद गरीबी थी अंग्रेजो को लगा कि ऐसी वीरान रेगिस्तान को लेकर क्या फायदा। इसलिए उनसे भी आज़ादी मिल गयी.

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