भारतीय प्रवासी Air Ticket Booking में पैसे बचाने के लिए करें इन 5 Tips का इस्तेमाल !

देश में अब विमान से सफर करने का ट्रेंड बहुत ज़्यादा बढ़ गया है. हवाई यात्रा करना सब की ज़रूरत बन गयी है, क्यूंकि ये वक़्त को बहुत हद तक बचाता है. वैसे टिकट तो एयरलाइन की महंगी होती ही है मगर जब इसे समझकर-बूझकर बुक किया जाए तो दाम में अच्छी किफ़ायत मिल सकती है.

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अगर आप हवाई यात्रा करने जा रहे हैं तो टिकट बुक कराने में इन 5 ख़ास बातों का रखे ध्यान होगी काफी बचत

1. कब बुक करें टिकट : फ्लाइट के टेक ऑफ करने के बाद एयरलाइंस कंपनी टिकट नहीं बेच सकती. इसलिए ज्यादातर एयरलाइंस कंपनियां जल्दी से जल्दी सीटें भरना चाहती हैं. इसलिए जितना जल्दी आप टिकट बुक कराएंगे उतना ही सस्ता यह आपको पड़ेगा.

2. किराया तय करने के लिए अलग सिस्टम : एयरलाइंस कंपनियों की जो किराये तय करने की प्रक्रिया है वह उत्पादकता प्रबंधन पर आधारित है यानी जिसे यील्ड मैनेजमेंट कहा जाती है. एयरलाइंस कंपनियों का मकसद हर पैसेंजर किलोमीटर पर अधिकतम रेवेन्यू कमाना है. आंकड़े देखें तो आप पाएंगे कि यात्री करीब उतना ही किराया चुका रहे हैं जितना वह बस या ट्रेन की यात्रा में चुका रहे हैं.

3. टिकट रिफंडेबल है या नहीं, 2500 है कैंसिलेशन फीस : नॉन रिफंडेबल टिकटों में एयरलाइंस अपने नुकसान की भरपाई करने की कोशिश करती हैं. सस्ते ऑफर की वजह से सीटें जल्दी भरती हैं इसलिए अगर किसी ने टिकट कैंसल किया तो एयरलाइंस की जेब में कुछ तो पैसा आएगा. इसलिए अगर आपकी यात्रा में दुविधा की स्थिति है तो हमेशा रिफंडेबल टिकट ही खरीदें. फिलहाल कोई भी एयरलाइंस कंपनी 2500 से ज्यादा कैंसिलेशन फीस नहीं चार्ज कर सकती है. अगर आपने 3000 रुपये की फ्लाइट बुक की है तो इसे कैंसिल कराने पर आपको महज 500 रुपये वापस मिलेंगे. कई बार टिकट 2500 से भी नीचे खरीदा गया तो आपके हाथ में कुछ नहीं आएगा.

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4.कई बार बीच वाली कतार में सस्ता रहता है टिकट : अपनी सीटें बेचने के लिए एयरलाइंस कंपनियां कई हथकंडे अपनाती हैं. ये एयरलाइंस ग्राहकों को एक ही फ्लाइट में अलग-अलग किराए का option देती हैं. आमतौर पर इकनॉमी क्लास में बीच वाली कतार में चेक इन बैगेज की अनुमति नहीं होती है. इसमें खाना भी नहीं रहता लेकिन ये टिकट सस्ते पड़ते हैं. अगर टिकट के साथ खाना शामिल न हो तो बेहतर है कि आप फ्लाइट में ही खाना आर्डर करिये. इससे भी आपको काफी बचत होगी.

5.मॉनिटियरिंग एयरलाइंस : डायरेक्टर जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) काफी गंभीरता के साथ एयरलाइंस कंपनियों के किरायों का मूल्याकंन करता है. जब भी कीमतें ऊपर-नीचे जाती हैं डीजीसीए एयरलाइंस की गतिविधियों की जांच करता है.

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